Give your Comment

CurrentGK -> General Knowledge -> India History -> सिन्‍धु सभ्‍यता -Indus Civilization

If you find this context important and usefull. We request to all visitors to sheare this with your friends on social networking channels.

सिन्‍धु सभ्‍यता -Indus Civilization

सिन्‍धु सभ्‍यता -Indus Civilization


  1. सिन्‍धु सभ्‍यता
  • रेडियोकार्बन सी14 ­­ जैसी नवीन विश्‍लेषण-पद्धति के द्वारा सिन्‍धु सभ्‍यता की सर्वमान्‍य तिथि 2350 ई0पू0 से 1750 ई0 पूर्व मानी गयी है।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता की खोज राबहादुर दयाराम साहनी ने की।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता को प्राक्ऐतिहासिक (Protohistoric) अथवा कास्‍य (Bronze) युग में रखा जा सकता है। इस सभ्‍यता के मुख्‍य निवासी द्रविड़ एवं भूमध्‍यसागरीय थे।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के सर्वाधिक पश्चिमी पुरास्‍थल सुतकागेंडोर (ब्‍लूचिस्‍तान), पूर्वी पुरास्‍थल आलमगीरपुर (जिला मेरठ, उत्‍तर प्रदेश), उत्‍तरी पुरास्‍थल मॉंदा ( जिला अखनुर जम्‍मू-कश्‍मीर) तथा दक्षिणी पुरास्‍थ्‍ाल दाइमाबाद (जिला अहमद नगर, महाराष्‍ट्र)
  • सिन्‍धु सभ्‍यता या सैंधव सभ्‍यता 4गरीय सभ्‍यता थी। सैंधव सभ्‍यता से प्राप्‍त परिपक्‍व अवस्‍था वाले स्‍थलों में केवल 6 को ही बड़े नगर की संज्ञा दी गयी है, ये हैं – मोहनजोदड़ो, हड़प्‍पा, गणवारीवाला, धौलावीरा राखीगढ़ी एवं कालीबंगन
  • स्‍वतंत्रता प्राप्ति पश्‍चात् हड़प्‍पा संस्‍कृति के सर्वाधिक स्‍थल गुजरात में खोजे गए है।
  • लोथल एवं सुतकोतदा – सिन्‍धु सभ्‍यता का बनदरगाह था।
  • जुते हुए खेत ओर नककायशीदार ईंटों के प्रयोग का साक्ष्‍य कालीबंगन से प्रापत हुआ है।
  • मोहनजोदड़ो से प्राप्‍त अननागार संभवत: सैधंव सभ्‍यता की सबसे बड्ी इमारत है।
  • मोहनजोदड़ो से प्राप्‍त बृहत् स्‍नानागार एक प्रमुख स्‍मारक है, जिसके मध्‍य स्थित स्‍नानकुंड 11.88 मीटर लम्‍बा, 7.01 मीटर चौड़ा एवं 2.43 मीटर गहरा है।
  • अग्निकुण्‍ड लोथल एवं कालीबंगन से प्राप्‍त हुए है।
  • मोहनजोदड़ो से प्राप्‍त एक शील पर तीन मुख वाले देवता (पशुपति नाथ) की मूर्ति मिली है। उनके चारों ओर हाथी, गैंडा, चीता एवं भैसा विराजमान है।
  • मोहनजोदड़ो से नर्तकी की एक कांस्‍य मूर्त्ति मिली है।
  • हड़प्‍पा की मोहरों पर सबसे अधिक एक श्रृंगी पशु का अंकन मिलता है।
  • मनके बनाने के कारखाने लोथल एवं चन्‍हूदड़ो में मिले है।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता की लि‍पि भावचित्रात्‍मक है। यह लिपी दाई ओर लिखी जाती थी। जब अभिलेख एक से अधिक पंक्तियों का होता था तो पहली पंक्ति दाई से बाई और दूसरी बाई से दाई ओर लिखी जाती थी।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लोगों ने नगरों तथा घरों के विन्‍यास के लिए ग्रीड पद्धति अपनाई।
  • घरों के दरवाजे ओर खिड़कियॉं सड़क की ओर न खुलकर पिछवाडे की ओर खुलते थे। केवल लोथल नगर के घरों के दरवाजे मुख्‍य सड़क की ओर खुलते थे।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता में मुख्‍य फसल थी – गेहूँ और जौ
  • सिन्‍धु वासी मिठास के लिए शहद का प्रयोग करते थे।
  • रंगपुर एवं लोथल से चावल के दाने मिले हैं, जिनसे धान की खेती होने का प्रमाण मिलता है। चावल के प्रथम साक्ष्‍य लोथल से ही प्राप्‍त हुए है।
  • सुरकोतदा, कालीबंगन एवं लोथल से सैंधवकालीन घोड़े के अस्थिपंजर मिले है।
  • तौल की इकाई संभवत: 16 के अनुपात में थी।
  • सैंधव सभ्‍यता के लोग यातायात के लिए दो पहियों एवं चार पहियों वाली बैलगाड़ी या भैंसागाड़ी का उपयोग करते थे।
  • मेसोपोटामिया के अभिलेखों में वर्णित मेलूहा शब्‍द का अभिप्राय सिन्‍धु सभ्‍यता से ही है।
  • संभवत: हड़प्‍पा संस्‍कृति का शासन वणिक वर्ग के हाथों में था।
  • पिग्‍गट ने हड़प्‍पा एवं मोहनजोदड़ों को एक विस्‍तृत साम्राज्‍य की जुड़वा राजधानी कहा है।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लोग धरती को उर्वकता की देवी मानकर उसकी पूजा किया करते थे।
  • वृक्ष-पूजा एवं शिव पूजा के प्रचलन के साक्ष्‍य भी सिन्‍धु सम्‍यता से मिलते हैं।
  • स्‍वस्तिक चिह्न संभवत: हडप्‍पा सभ्‍यता की देन हैा इय चिह्न से सूर्यापासना का अनुमान लगाया जाता है। सिन्‍धु घाटी के नगरों में किसी भी मंदिर, के अवशेष नहीं मिले है।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता में मातृदेवी की उपासना सर्वाधिक प्रचलित थी।
  • पशुओं में कुबड़ वाला सॉंड़, इस सभ्‍यता के लोगों के लिए विशेष पूजनीय था।
  • स्‍त्री मृण्‍मूर्तियाँ  (मिट्टी की मूतियॉं) अधिक मिलने से ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि सैंधव समाज मातृसत्‍तात्‍मक था।
  • सैंधववासी सूती एवं ऊनी वस्‍त्रों का प्रयोग करते थे।
  • मनोरंजन के लिए सैंधववासी मछली पकड़ना,शिकार करना, पशु-पक्षियों को आपस में लड़ाना, चौपड़ और पासा खेलना आदि साधनों का प्रयोग करते थे।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लाग काले रंग से डिजायन किए हुए लाल मिट्टी के बर्तन बनाते थे।
  • सिन्‍धु घाटी के लोग तलवार से परिचित नहीं थे।
  • कालीबंगन एक मात्र हड़प्‍पाकालीन स्‍थल था, जिसका निचला शहर (सामान्‍य लोगों के रहने हेतु) भी किले से घिरा हुआ था।
  • पर्दा-प्रथा एवं वेश्‍यावृत्ति सैंधव सभ्‍यता में 5्रचलित थी।
  • शवों को जलाने एवं गाड़ने यानी दोनों प्रथाएँ प्रचलित थी। हड़प्‍पा में शवों को दफनाने जबकि मोहनजोदड़ो में जलाने की प्रथा विद्यमान थी। लोथल एवं कालीबंगन में युग्‍म समाधियाँ मिली है।
  • सैंधव सभ्‍यता के विनाश का संभवत: सबसे प्रभावी कारण बाढ़ था।
  • आग की पकी हुई मिट्टी को टेराकोटा कहा जाता था।




20 Sep, 2018, 00:07:26 AM