CurrentGK -> General Knowledge -> Rajasthan -> Rajasthan Sujas February 2012

If you find this context important and usefull. We request to all visitors to sheare this with your friends on social networking channels.

Rajasthan Sujas February 2012

Rajasthan Sujas February 2012

सुजस फरवरी, 2012

 

राजस्‍थान राज्‍य विद्युत उत्‍पादन निगम विद्युल गति से बढ़ते चरण

  • 19 जुलाई, 2000 को कम्पनी अधिनियम, 1956 के अधीन राजस्‍थान  राज्‍य विद्युल उत्‍पादनल निगम लिमिटेड का गठन किया गया।
  • 15 पावर स्‍टेशनों से 13.27 मेगावाट विद्युल उत्‍पादन हुआ करता था।
  • 660 मेगावाट की सातवीं व आठवीं इकाइयां स्थापित की जा रही है।
  • 660 मेगावाट क्षमता की 2 और सुपर क्रिटिकल ताप इकाइयों क्रमश: नौ व दस की स्‍थापना के लिए प्रशासनिक एवं वि‍त्‍तीय स्‍वीकृति 24 जून, 2010 को प्रदान कर दी है।
  • चार सुपर क्रिटिकल इकाइयों के निर्माण कार्य पूर्ण होने पर इस विद्युतगृह की अधिष्‍ठापित क्षमता बढ़कर 4140 मेगावाट हो जाएगी।
  • 660 मेगावाट क्षमता की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयां स्‍थापित करने की स्‍वीकृति दी
  • गिरल लिग्‍नाइट थर्मल पावर स्‍टेशन
  • ·लिग्‍नाइट का उपयोग कर विद्युत उत्‍पादन करने हेतु गिरल लिग्‍नाइट थर्मल पावर स्‍टेशन की स्‍थापना की गई।
  • कालीसिंध सुपर थर्मल परियोजना में दो इकाइयों एवं सुपर क्रिटिकल ताप इकाइयों की स्‍थापना के लिए प्रशासनिक एवं वित्‍तीय स्‍वीकृति प्रदान कर दी है।
  • बारहवीं पंचवर्षीय योजना (वर्ष 2012-17) में चालू होने वाली परियोजनाएं (7750 मेगावाट)
  • वर्ष 2017 के अन्‍त तक विद्युत उत्‍पादन निगम की अधिष्‍ठापित क्षमता बढ़कर 13700 मेगावाट से अधिक हो जाएगी।  

 

राज्‍य में अक्षय ऊर्जा का विकास

  • राजस्‍थान अक्षय ऊर्जा निगम राजस्‍थान में अक्षय ऊर्जा स्‍त्रोतों से ऊर्जा उत्‍पादन, संरक्षण एवं ऊर्जा क्षमता को बढ़ावा देने के लिए राज्‍य नामित अभिकरण है।
  • राज्‍य सरकार द्वारा 'गैर-परम्‍परागत ऊर्जा स्‍त्रोतों से विद्युत उत्‍पादन को बढ़ावा देने की नीति' अक्‍टूबर, 2004 में एवं 26 फरवरी, 2010 को नई बायोमास नीति-2010 जारी की गई।
  • 19 अप्रैल, 2011 को सौर ऊर्जा के विकास हेतु 'सौर ऊर्जा नीति-2011' जारी की गई है।
  • पवन ऊर्जा की सकल अनुमानित उत्‍पादन क्षमता 5400 मेगावाट है।

 

विद्युत उत्‍पादन को सर्वोच्‍च प्राथमिकता

  • परम्‍परागत स्‍त्रोतों जल, कोयला और गैस सीमित मात्रा में हैं। चम्‍बल व माही को छोड़कर प्रदेश में बारहमासी नदियों का अभाव है। कोयला छत्‍तीसगढ़ से आता है।
  • बाड़मेर, बीकानेर और नागौर जिले में लिग्‍नाइट (भूरा कोयला) उपलब्‍ध है।
  • गैस भी केवल जैसलमेर जिले में उपलब्‍ध है। सीमित ही सही पर इन उपलब्‍ध स्‍त्रोंतों का उपयोग करने के लिए चम्‍बल नदी पर राणा प्रताप सागर व जवाहर सागर में एक-एक तथा माही नदी पर बांसवाड़ा जिले में दो बिजलीघर लगाए गए हैं। लिग्‍नाइट उपयोग के लिए बाड़मेर में गिरल व जालिपा-कपूरडी में एवं बीकानेर जिले के बरसिंहसर व गुढ़ा में बिजलीघर लगे हैं। गैस आधारित ‍बिजलीघर धौलपुर व जैसलमेर जिले के रामगढ़ में स्‍थापित किए गए हैं।
  • कोटा, सूरतगढ़ और छबड़ा में कोयला आ‍धारित ताप पबजलीघर लगाए गए हैं जिनके लिए कोयला छत्‍तीस गढ़ से लाया जाता है। कालीसिंघ (झालावाड़) में भी कोयला आधारित एक ताप विद्युतगुह निर्माणा‍धीन हैं।
  • राज्‍य सरकार का सबसे बड़ा फैसला प्रदेश में सुपर क्रिटिकल थर्मल इकाइयां स्‍थापित करने का हैं।
  • सूरतगढ़, छबड़ा, कालीसिंध और बांसवाड़ा में 10 इकाइयं स्‍थापित की जागी जिनकी प्रत्‍येक की क्षमता 660 मेगावाट है। सुपर क्रिटिकल ताप बिजलीघरों में कोयले की खपत सब-क्रिटिकल ताप बिजलीघरों की अपेक्षा तुलनात्‍मक रूप से कम होती है।
  • कोटा, छबड़ा और धौलपुर में 330-330 मेगावाट तथा रामगढ़ में 160 मेगावाट क्षमता की गैस आधारित इकाइयां लगाई जाएंगी।
  • बाड़मेर जिले में लिग्‍नाइट आधारित एक बिजलीघर राजवेस्‍ट पावर द्वारा स्‍थापित किया जा रहा है जिसकी क्षमता 1080 मेगावाट हैं।
  • बीकानेर जिले के गुढ़ा में भी 70 मेगावाट क्षमता का एक लिग्‍नाइट आधारित बिजलीघर स्‍थापित करने के लिए कार्यादेश दिया जा चुका है।
  • बांसपरड़ा में 1320 मेगावाट क्षमता का एक सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित ताप बिजलीघर तथा केशोरायपाटन (बूंदी) में 1000 मेावाट एक गैस आधारित ताप बिजलीघर भी निजी क्षेत्र में स्‍थापित करने के लिए चिन्हित किया गया हैं।
  • मैसर्स अडानी एन्‍टरप्राइज द्वारा कवई में स्‍थापित किए जा रहे 1320 मेगावाट क्षमता के विद्युतगृह की बिजली भी राज्‍य की वितरण कम्‍पनियों द्वारा क्रय करने का अनुबंध किया जा चुका है।
  • बांसवाड़ा जिले में ही मैसर्सं सिद्धी एनरटेक द्वारा स्‍थापित किए जाने वाले 1320 मेगावाट क्षमता के बिजलीघर से भी आधी बिजली राज्‍य को उपलब्‍ध होगी।
  • भारत सरकार ने बांसवाड़ा में एक आणविक बिजलीघर की स्‍थापना भी सैद्धान्तिक रूप से प्रस्‍तावति की है जिसमें प्रत्‍येक 700 मेगावाट क्षमता की चार इकाइयां स्‍थापित की जाएगी।
  • ·

चमक उठेगा राजस्‍थान

  • रावतभाटा स्थित आरएपीपी की 700-700 मेगावाट की 7वीं व 8वीं इकाइ्र से राज्‍य को आधी बिजली मिलेगी।

 

लोक आस्‍था का प्रतीक देशनोक का करणी माता मंदिर

  • विश्‍व में अपनी ही तरह का एक अनूंठा मंदिर देशनोक, बीकानेर में है।
  • यह करणी माता का मंदिर विश्‍व भर में चूहों वाले मंदिर के नाम से विख्‍यात है।
  • यहां सफेद चूहा दिखना बहुत शुभ माना ताजा है।

 

मण्‍डोर के देवल

  • मध्‍य काल में राजाओं की मृत्‍यु के पश्‍चात् उनकी स्‍मृति में विमानों एवं देवालयों की आकृति में जो स्‍मारक बनाए जाते थे वे देवल कहलाते थे।
  • देवल महाराव मालदेव (1532 ई. से 1562 ई.) का हैं।

 

राजपथ पर राजस्‍थान

  • नई दिल्‍ली में रायसिना हिल्‍स पर स्थित भव्‍य राष्‍ट्रपति भवन की तलहटी में विजय चौक से शुरू होकर राजपथ पर देश के शौर्य, विकास कला और संस्‍कृति की शानदार प्रस्‍तुति देने वाली गणतन्‍त्र दिवस परेड़ में इस वर्ष भी राजस्‍थान की बहुरंगी झालक देखने को मिली।
  • पाहली बार वायुसेना के दस्‍ते का नेतृत्‍व किसी महिला अधिकरी ने किया और यह गौरव प्राप्‍त हुआ राजस्‍थान के सीकर जिले की निवासी फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुश्री स्‍नेहा शेखावत को ।

 

हवाएं दे रही हैं उजाले का पैगाम

  • जोधपुर जिले में राजस्‍थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड के साथ ही मैसर्स सूजलोन एनर्जी लिमिटेड, मैसर्स एनरकॉन इण्डिया लिमिटेड तथ्‍ज्ञा मैसर्स वेस्‍टास इण्डिया लिमिटेड द्वारा विण्‍ड परियोजनाओं की स्‍थापना की जा चुकी है।
  • विण्‍ड पावर प्रोजेक्‍ट  मेसर्स सूजलोन एनर्जी लिमिटेड

 

दिवेर : महाराणा की प्रतिमा और विजय स्‍मारक का लोकार्पण

  • राष्‍ट्रपति, श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटी ने गत दिनों मेवाड़ के मैराथन दिवेर में महाराणा प्रताप की प्रतिमा का और विजय स्‍मारक का लोकार्पण किया।
  • मेवाड़ कॉम्‍पलेक्‍स के तहत दिवेर में नवनिर्मित महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण व विजय स्‍मारक का लोकार्पण 10 जनवरी 2012 को भारत की राष्‍ट्रपति ने किया।
  • हल्‍दीघाटी युद्ध के 6 वर्ष बाद 1582 ई; में बिजयादशमी के दिन महाराणा प्रताप एवं मुगल सम्राट अकबर की सेनाओं के बीच भीषण संग्राम हुआ था। महाराणा प्रताप ने छापामार युद्ध पद्धति से मुगलों के सैनिक अभ्यिानों को निष्‍फल कर विजय प्राप्‍त की।
  • दिवेर की ऐतिहासिक विजय महाराणा प्रताप के जीवन का उज्‍ज्‍वल कीर्तिमान था। इस युद्ध में मुगल सेना के बहलोल खां एवं सुल्‍तान खां मारे गए थे।
  • कर्नल जेम्‍सटॉड ने दिवेर युद्ध को मेवाड़ के मैराथन व हल्‍दीघाटी करे मेवाड़ की थर्मोपली की उपमा दी र्थी।

 

मेवाड़ का अजेय दुर्ग कुम्‍भलगढ़

  • अजेय व सामरिक महत्‍व के रहे हैं।
  • इनमें से ही एक दुर्ग है राजसम्‍न्‍द जिले का कुम्‍भलगढ़।
  • मेवाड़ के महाराणा कुम्‍भा द्वारा 5वीं शताब्‍दी में इस विशाल दुर्ग का निर्माण करवाया।
  • यह दुर्ग मेवाड़ के महानायक महाराणा प्रताप की जन्‍म स्‍थली भी रहा है। मेवाड1 में चित्‍तौड़गढ़ के पश्‍चात दूसरा सामरिक महत्‍तव का किला है।
  • कुम्‍भलगढ़ के सबसे ऊपरी हिस्‍से में कलाम्‍तक बादल महल बना हुआ हैं।
  • राज्‍य सरकार ने कुम्‍भलगढ़ को राष्‍ट्रीय अभयारण्‍य घोषित किया है।
  • बसंत पंचमी पर तीन दिवसीय कुम्‍भलगढ़ समारोह आयोजित किया जाता हैं।

 

वैकल्पिक ऊर्जा के लिए रतनजोत के बीज

  • रतनजोत एक हराभरा जंगली किस्‍म का पौधा है जो बिना किसी प्रयास के बंजर भूमि में पैदा होता है। अब रतनजोत के बीजों से बायो फ्यूल बनाने में प्राप्‍त सफलता के बाद रतनजोत का बेकार सा समझा जाने वाला पौधा अति उपयोगी हो गया है।
  • रतनजोत का पौधा मेवाड़ क्षेत्र की भूमि में अच्‍छे से पनपता है।
  • वर्तमान में रतनजोत का मूल्‍य 12 रूपये प्रति किलो के लगभग है।
  • राजसमन्‍द के जिला कलक्‍टर, डॉ0 प्रीतम बी. यशवंत भी जिले में रतनजोत की खेती को बढ़वा देने की पूरी रूचि दिखा रहे है।

 

यादगार रहा विश्‍वविख्‍यात मरू-महोत्सव

  • साकर खां पश्चिमी राजस्‍थान के पहले ऐसे मांगणियार लोक कलाकार हैं जिन्‍हें पद्मश्री का गौरव प्राप्‍त हुआ है।
  • जैसलमेर जिले में पालीवालों के परित्‍यक्‍त, वैभवशाली रहे गांव कुलधरा को देखा।
  • ·

खुद राग बन जाना चाहता हूं .... सलिल भट्ट

  • विश्‍व में संगीत के सबसे बड़े पुरस्‍कार ‘ग्रेमी अवार्ड’ से सम्‍मानित होने वाले देश के दूसरे भारतीय संगीतज्ञ पद्मश्री पण्डित विश्‍वमोहन भट्ट के सबसे बड़े पुत्र और मोहनवीणा वदक सलि‍ल भट्ट आज अपने पिता की छाया से बाहर निकल चुके हैं।

 

सास-बहू मन्दिर

  • उदयपुर से 20 किलोमीटर दूर बाघेला तालाब के किनारे प्राकृतिक परिवेश में निर्मित सास-बहू के मन्दिर अपनी स्‍थापत्‍य और मूर्तिकला में बेजोड़ हैं।

 





24 Aug, 2019, 00:19:21 AM