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Rajasthan Sujas August 2013

Rajasthan Sujas August 2013

सुजस अगस्‍त 2013

v    मुख्‍यधारा से जुड़ते जनजाति क्षेत्र

  • 2080 करोड़ रूपये की 176 किलोमीटर लम्‍बी रतलाम-बांसवाड़ा-डूंगरपुर रेल लाइन योजना प्रारम्‍भ की है।
  • उदयपुर में राजीव गांधी ट्राइबल यूनिवर्सिटी की स्‍थापना

 

v    जनजाति कल्‍याण : महत्‍त्‍वपूर्ण्‍ उप‍लब्धियां

  • भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 46 में अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक एवं शैक्षणिक स्‍तर में सुधार लाने के विशेष प्रयास करने की जिम्‍मेदारी राज्‍य को दी गई हैं। पचंवर्षीय योजना में राज्‍य सरकार द्वारा वर्ष 1975 में जनजाति विकास विभाग की स्‍थापना की गयी।
  • नवाचार के तहत जनजाति बालिकओं के लिए उदयपुर में तथा जनजाति बा‍लकों के लिए डूंगरपुर में मॉडल पब्लिक स्‍कूल की स्‍थापना।

 

v    बदला-बदला सा है आदिवासी गांवों का स्‍वरूप मुख्‍यमंत्री की बजट घोषणाओं की तेजी से क्रियान्विति

  • राजस्‍थान की एकमात्र घोषित आदिम जनजाति सहरिया
  • जनजाति क्षेत्रों में ऋषभदेव, मानगढ़धाम एवं बेणेश्‍वर धाम के विकास के लिए 5-5 करोड़ रूपये से कराये जाने वाले कार्यों की प्रक्रिया प्रारम्‍भ हो गई है।
  • सिरोही जिले के भीमाणा गांव में शहीद हुए आदिवासियों की स्‍मृति में ग्राम लीलूणी बड़ली नामक स्थल पर 103.90 लाख रूपये की स्‍वीकृति के साथ निर्माण कार्य प्रारम्‍भ कर दिया गया है।
  • बारां जिले के शाहबाद एवं किशनगंज तहसीलों में रहने वाले सहरिया आदिवासियों के लिए संचालित विशेष उप योजना में सहरिया परिवारों को 35 किलोग्राम गेहूं नि:शुल्‍क उपलब्‍ध कराया जा रहा है।

 

v    जनजातियों की पृष्‍ठभूमि

  • जन‍जातियों के संदर्भ में हमारा देश अफ्रीकन महाद्वीप के बाद दूसरे स्‍थान पर आता है। राजस्‍थान में प्राचीनतम जातियों का बहुत बड़ा समुदाय है जो देश की कुल जनसंख्‍या के औसतन 8 प्रतिशत के आस-पास है।
  • भीलों ने डूंगरपुर, बांसवाड़ा, कुशलगढ़, प्रतापगढ़ व कोटा पर राज किया। मीणाओं ने जयपुर, अलवर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर व बूंदी पर राज्‍य किया।
  • राजस्‍थान की जनजातियों में भील और मीणा करीब 94 प्रतिशत स्‍थान रखते हैं। गरासिया, सहरिया और डामोर इनके बाद आते हैं। कथौड़ी, भील-मीणा, नाटकदास और पटेल भी शेष आदिवासी जातियों में जाने जाते हैं।
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v    उप योजना व्‍यूह रचना

  • समेकित जनजाति विकास परियोजना (आईटीडीपी), परिवर्तित क्षेत्र विकास उपागमन (माडा), माडा क्‍लस्‍टर विकास योजना, आदिम जाति विकास योजना तथा बिखरी जनजाति विकास योजना तैयार की गई। अब सभी विभागों की 13 प्रतिशत राशि जनजाति विकास के लिए प्रदान की जाती है।

 

v    अधिसूचित क्षेत्र

  • राज्‍य के दक्षिण-पूर्व में स्थित 5 जिलों बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर एवं सिरोही जिलों की 23 तहसीलों को मिलाकर अनुसूचित क्षेत्र निर्मित किया गया है जिसमें जनजाति का सघन आवास है।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार इस क्षेत्र की जनसंख्‍या 45.14 लाख है जिसमें जनजातियों की जनसंख्‍या 30.93 लाख है जो इस क्षेत्र की जनसंख्‍या की 68.52 प्रतिशत है।
  • आबूरोड़ पंचायत समिति सम्मिलित हैं। इस क्षेत्र में आवासित जनजातियों में भील, मीणा, गरासिया व डामोर प्रमुख हैं।

 

v    परिवर्तित क्षेत्र विकास उपागमन (माडा)

  • प्रत्येक लघु खण्‍ड की कुल जनसंख्‍या 10 हजार या इससे अधिक।
  • सभी ग्रामों में 50 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की आबादी हो, के आधार पर माडा क्षेत्र बनाया गया है।
  • मीणा जनजाति का बाहुल्‍य है।

 

v    माडा क्‍लस्‍टर योजना क्षेत्र

  • 5 हजार या इससे अधिक है 50 प्रतिशत से अधिक जनसंख्‍या जनजाति की है, में माडा क्‍लस्‍टर योजना लागू की जाकर विकास कार्यक्रम क्रियान्वित किए जा रहे है।

v    बिखरी जनजाति योजना क्षेत्र

  • जनजाति उपयोजना, माडा लघुखण्ड, माडा क्‍लस्‍टर एवं सहरिया क्षेत्र के अतिरिक्‍त 22.91 लाख जनजाति के व्‍यक्ति 30 जिलों में बिखरे हुए है।

 

v    सहरिया आदिम जाति क्षेत्र

  • राज्‍य की एकमात्र आदिम जाति सहरिया है जो बारां जिले के किशनगंज एवं शाहबाद तहसीलों में निवास करती है। उक्‍त दोनों ही तहसीलों के क्षेत्रों को सहरिया क्षेत्र में सम्मिलित किया जाकर सहरिया वर्ग के विकास के लिए सहरिया विकास समिति का गठन किया गया है। कुल जनसंख्‍या का 34.20 प्रतिशत है।

 

v    बांसवाड़ा बनेगा पावर हब

  • जिले के दानपुर क्षेत्र में 2 गुणा 660 मेगावाट क्षमता के सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्‍लान्‍ट के लिए भूमि अधिग्रहण।
  • राजस्‍थान राज्‍य विद्युत उत्‍पादन निगम लिमिटेड, जयपुर द्वारा जिले के फेफर ग्राम में 2 गुणा 660 मेगावाट सुपर क्रिटिकल थर्मत पावर प्लान्‍ट की स्‍थापना।
  • 16 नवम्‍बर, 2009 को उर्जा विभाग राजस्‍थान सरकार जयपुर द्वारा जारी की गई है। सागडूंगरी (बागीदौरा) में 1000 मेगावाट क्षमता के गैस आधारित विद्युत संयंत्र की स्‍थापना हेतु सर्वे करवाया जा चुका है।
  • रतलाम-बांसवाड़ा-डूंगरपुर-स्‍वरूपगंज मार्ग को राष्‍ट्रीय राजमार्ग में परिवर्तित किए जाने की घोषणा की जा चुकी है।

 

v    वनाधिकार ने पलट दी वनवासियों की किस्‍मत

  • राज्‍य सरकार ने अनुसूचित जनजाति एवं अन्‍य परम्‍परागत वनवासियों को जंगल की जमीन के पट्टे देकर वनाधिकार सौंपे हैं।
  • ·इस कानून को 31 दिसम्‍बर, 2007 को अधिसूचित किया गया।
  • ·लगभग 5 हजार वन अधिकार समितियों का गठन किया गया है।
  • ·30 मई, 2013 तक 33 हजार 645 अधिकार पत्र जारी किए जा चुके हैं। इन पट्टों के जरिये आदिवासियों को 50 हजार 899.97 एकड़ वन भूमि के अधिकार सौंपे गये है।
  • ·प्रदेश में सबसे ज्‍यादा 11 हजार 720 अधिकार पत्र बांसवाड़ा जिले में जारी किए गए हैं।
  • ·वनाधिकार दावों के निस्‍तारण में राजस्‍थान का प्रतिशत 95.01 है।

 

v    सहरिया : सामाजिक परम्‍पराएं

  • राजस्‍थान के हाड़ौती अंचल तथा बारां जिले के शाहबाद एवं किशनगंज उपखण्‍डों में सहरिया जनजाति का बाहुल्‍य है।
  • पु‍त्री के जन्‍म पर एक विशेष प्रकार का सादा व्‍यंजन घूघरी (कोंहरी) बनाकर बांटी जाती है। घुघरी – मक्‍का, चना, गेहूं को उबाल कर उसमें से पानी निथार कर बनाई जाती है जिसे केवल महिलाएं खाती है। इस परम्‍परा को (सोभर कोंहरी) ‘ज्‍वापा’ कहा जाता है जो शिशु के जन्‍म के तीन दिन बाद निभाई जाती है।
  • नजवात शिशु के पांव उस पर मांड कर पूजा की जाती है। यह रस्‍म ‘पेहरान’ अर्थात नये वस्‍त्र पहनाने की क्रिया कहलाती है।
  • सहरिया परिवार में बच्‍चा जब तीन-चार साल का हो जाता है तो पहली बार उसके सिर के बाल कटवाये जाते हैं। इस परम्‍परा को ‘जरूली’ कहा जाता है। इस परम्‍परा में इनके आराध्‍य देवी-देवता के बोलमा अर्थात मनौती की जाती है।
  • राज्‍य सरकार ने जनजाति आयोग के अध्‍यक्ष – के.एल. मीना
  • भीलों में राजनैतिक चेतना जागृत करने के लिए आन्‍दोलन कर मांग पेश करने के लिए स्‍व. सर्वश्री माणिक्‍य लाल वर्मा, मोहनलाल सुखाडि़या, भोगीलाल पंड्या, भूरेलाल बाय, बलवंत सिंह मेहता, गोरीशंकर उपाध्‍याय आदि नेताओं ने आदिवासी नेता भीखा भाई भील में विचार-‍विमर्श किया और 1940 में एक वनवासी सेवा संघ डूंगरपुर की स्‍थापना की।

v    मुख्‍यमंत्री अन्‍न सुरक्षा योजना

  • 10 मई, 2010 से प्रारम्‍भ की गई है।
  • बीपीएल वर्ग के लोगों को अन्‍न सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता के आधार पर 2 रूपये प्रति किलोग्राम की दर पर 25 किलोग्राम प्रति परिवार (अन्‍त्‍योदय परिवारों को 35 किलोग्राम) गेहूं प्रति माह उपलब्‍ध कराया गया। 1 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं उपलब्‍ध कराने की स्‍वीकृति 28 मार्च, 2013 को जारी की गई। 18.27 लाख बीपीएल, 11.24 लाख स्‍टेट बीपीएल तथा 9.32 लाख अन्‍त्‍योदय अन्‍न योजना अर्थात लगभग 38.83 लाख परिवारों को मुख्‍यमंत्री अन्‍न सुरक्षा योजना में लाभान्वित किया जा रहा हैं

v    सहरिया व कथौड़ी जाति को नि:शुल्‍क खाद्यान्‍न

  • राज्‍य के बारां जिले के किशनगंज एवं शाहबाद पंचायत समिति की सहरिया जनजाति के 18,748 परिवारों तथा उदयपुर जिले के कथौड़ी जनजाति के 1080 परिवारों को 35 किलोग्राम गेहूं नि:शुल्‍क उपलब्‍ध कराया जा रहा है।
  • सहरिया परिवारों को कुपोषण से बचाने हेतु नि:शुल्‍क खाद्य तेल, देशी घी व दाल उपलब्‍ध कराने की मुख्‍यमंत्री की घोषणा के तहत माह दिसम्‍बर, 2012

 

v    खेती बाड़ी में नवाचार

  • किसान कॉल सेंटर के माध्‍यम से किसानों को टेलीफोन नम्‍बर 1551 पर खेती की हर तरह की जानकारी उनकी भाषा में नि:शुल्‍क उपलब्‍ध कराई जाती है।

 

v    प्राकृतिक  सौन्‍दर्य का खजाना गढ़मोरा

  • करौली जिले की नादौती तहसील क्षेत्र में अरावली पर्वत श्रृंखला की गोद में बसों गढ़मोरा पौराणिक, ऐतिहासिक एवं रमणीक कस्‍बा है। इतिहासकार कर्नल टॉड के अनुसार मोरा ग्राम राजा मोरध्‍वज ने बसाया था। मोरध्‍वज के महल, मन्दिर परकोटे तथा कोणार्क शैली में बौद्ध स्‍तूप 13वीं-14वीं शताब्‍दी की वास्‍तुकला के बेहतर नमूने हैं।
  • भारत में एकमात्र भगवान हनुमान पुत्र मकरध्‍वज का मन्दिर तथा प्राकृतिक सौन्‍दर्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते है।

 

v    डांग क्षेत्र में सर्वांगीण विकास के बढ़ते कदम

  • डांग क्षेत्र के अन्‍तर्गत राज्‍य के 8 जिलों भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, बूंदी, कोटा, बारां व झालावाड़ की 22 पंचायत समितियों की 371 ग्राम पंचायतें आती है।
  • कोटा सम्‍भाग का डांग क्षेत्र जिसमें सहरिया क्षेत्र भी आता है।
  • सन् 1995-96 में डांग क्षेत्रीय विकास योजना प्रारम्‍भ हुई।

 

v    कमाल के हैं कथौड़ी जनजाति के वाद्य यंत्र

  • प्रकृति-पुत्रों की एक जाति है कथौड़ी।
  • पेड़ से कत्‍था निकाल कर जीविकोपार्जन करने वाले ये कथौड़ी अपने वाद्य यंत्र भी प्रकृति सुलभ चीजों से ही बनाते हैं।
  • राजस्‍थान में उदयपुर जिले के झाड़ोल क्षेत्र में निवास करने वाले ये आदिवासी तारपी, टापरा, थालीसर, पावरी, खेखरा और गोरिया जैसे वाद्य यंत्रों को बजाते हैं।
  • तारपी वाद्य यंत्र का निर्माण बड़े आकार की लौकी से किया जाता है।
  • फूंक वाद्यों में ही एक दूसरा वाद्य है – पावरी।
  • पीतल की बड़ी थाली से बना वाद्य यंत्र थालीसर कहलाता हैं।
  • बांस से बनाए जाने वाले वाद्य यंत्रों में से एक है – टापरा।

 

v    आजादी की लड़ाई में राजस्‍थान की भूमिका

  • 19वीं सदी के प्रारम्‍भ में राजस्‍थान के रियासती राजाओं ने ब्रिटिश सरकार की अधीनता स्‍वीकार कर ली थी।
  • गोविन्‍द गुरू: स्‍वामी दयानन्‍द सरस्‍वती के परम शिष्‍य गोविन्‍द गुरू ने वागड़ अंचल के आदिवासी समूहों के बीच सामाजिक सुधार का काम हाथ में लिया।
  • सामाजिक बुराइयों और बुरे व्‍यसनों से उन्हें मुक्ति दिलाना।
  • 1883 में एक सम्‍पसभा का गठन किया। उन्‍होंने बांसवाड़ा के निकट मानगढ़ की पहाड़ी पर एक मन्दिर बनाकर धूणी रमाई।
  • उन्‍होंने अंग्रेजों की मदद से इस सामाजिक जागरण को कुचल देने का दुष्‍चक्र रचा और 17 नवम्‍बर, 1913 को देशी रियासत और अंग्रेजी फौज ने मानगढ़ की पहाड़ी को चारों ओर से घेर लिया।
  • भीलों की सम्‍प सभा को अंग्रेज फौज ने जिस बेरहमी से मशीनगनों की गोलियों का शिकार बनाया, उसके सामने तो जलियावाला बाग की घटना भी फीकी नजर आती हैं। देखते ही देखते मानगढ़ की पहाड़ी खून से लथपथ हो गई। लगभग 1500 लाशों का ढेर लग गया।
  • शाहपुरा के ठाकुर केसरीसिंह बारहठ, खरवा के ठाकुर गोपालसिंह और जयपुर के अर्जुनलाल सेठी।
  • केसरी सिंह बारहठ के छोटे भाई जोरावर सिंह एंव बेटे कुंवर प्रताप ने दिल्‍ली पहुंचकर अंग्रेज वायसराज की सवारी पर बम विस्‍फोट कर अंग्रेज सत्‍ता को सीधी चुनौती दी। उन्‍हें यह काम रासबिहारी बोस ने सौंपा था।
  • भूतपूर्व केन्‍द्र शासित प्रदेश अजमेर में सशस्‍त्र विद्रोह का श्रीगणेश खरवा ठाकुर गोपालसिंह ने किया। वे भी क्रान्तिकारी रासबिहारी बोस के सीधे सम्‍पर्क में रहे थे।
  • जयपुर के अर्जुनलाल सेठी को भी क्रान्तिकारियों से सम्‍पर्क के कारण जयपुर और वैल्‍लोर की जेल में रखा गया। सेठीजी ने जयपुर में वर्धमान विद्यालय की स्‍थापना की थी।
  • निरक्षर आदिवासियों वाले डूंगरपुर में भोगीलाल पण्‍ड्या ने 1935 में हरिजन सेवा समिति का गठन किया।
  • ’जैसलमेर में गुण्‍डाराज’ पुस्‍तक लिखने के आरोप में सागरमल गोपा को पांच वर्ष की सजा सुनाई गई।
  • ·बिजौलिया पहुंच कर किसानों को उनकी भूमि सौंप दी।
  • इसी साल 9 जून, 1942 को जोधपुर में भारत रक्षा कानून के तहत क्रांतिकारी बालमुकुन्‍द बिस्‍सा को गिरफ्तार कर लिया गया। इससे आहत होकर महात्‍मा गांधी ने 21 जून, 1942 को ‘हरिजन’ में लिखा था।
  • 18 जून को अत्‍याचारों से ग्रस्‍त बालमुकुन्‍द बिस्‍सा शहीद हो गए।
  • माणिक्‍यलाल वर्मा ने मुम्‍बई के।
  • शिवचरण माथुर ने गुना-कोटा के बीच एक रेल्‍वे पुल को डायनामाइट से ध्‍वस्‍त कर दिया। भारत छोड़ो आंदोलन के संदर्भ में देखें तो सर्वाधिक उग्र प्रभाव हाड़ौती में देखने को मिलता है।
  • 1857 के संघर्ष के समय भी धनतेरस के दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ था जब मेजर बर्टन को मार गिराया था जिसमें तत्‍कालीन महाराव रामसिंह की भूमिका नजर आती है। कवि सूर्यमल्‍ल मिसण ने कहा था।
  • जयपुर रियासत में प्रजामण्‍डल ने संघर्ष करने के बजाय बीच का रास्‍ता अपनाया। बीकानेर में महाराजा गंगासिंह के निरंकुश शासन के कारण भारत छोड़ो आंदोलन अपनी कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभा सका।
  • 1945 में उदयपुर में पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्‍व में आयोजित हुआ अखिल भारतीय देशी राज्‍य लोक परिषद् का अधिवेशन महत्‍त्‍वपूर्ण आधार बना।
  • शासन नहीं चाहता था की प्रजामण्‍डल के साये में संचालित स्‍कूल चलें। इसी बंदिश की परिणति में नानाभाई के साथ सेंगाभाई को फौजी ट्रक से बांधकर घसीटा तो बालिका कालीबाई यह सब सह न सकी। उसने ट्रक का पीछा करके हंसिये से रस्‍से को काट दिया तो बदले में उस पर गोलियां चलाई गई। भील कन्‍या कालीबाई की शहादत आज भी रोंगटे खड़े कर देती है।
  • महारावल ने घोषणा कर रखी थी कि जो भी व्‍यक्ति हरदेव जोशी का सिर काट कर लाए या उन्‍हें जिंदा पकड़ लाए, उसे पांच हजार रूपये का इनाम दिया जाएगा।
  • जैसलमेर की जेल में बंद सागरमल गोपा 4 अप्रैल, 1946 को शहीद हुए।
  • धौलपुर रियासत में भी कुछ इसी तरह की घटनाएं घटी। वहां तसीमों नामक गांव में तिरंगे की खातिर छतरसिंह एवं पंचमसिंह ने पुलिस के सामने सीना खोलकर गोली खाई।

 

v    पचपदरा जहां नमक सत्‍याग्रह की पृष्‍ठभूमि तैयार हुई

  • मारवाड़ में 89 स्‍थानों पर नमक उत्‍पादन बन्‍द करने का निर्णय लिया।
  • गुलाबचन्‍द सालेचा ने नमक नीति के खिलाफ आवाज बुलंद की।
  • ·

v    जैसलमेर का वुड फॉसिल्‍स पार्क करोड़ों वर्ष का इतिहास बोलता है यहां

  • जैसलमेर जिले के आकल में स्‍थापित वुड फॉसिल्‍स पार्क भी प्राचीनतम जीवाश्‍मों के लिए प्रसिद्ध है।
  • किसी समय समुद्री क्षेत्र रहा तथा बाद में शुष्‍क रेतीले मरूस्‍थल में तब्‍दील हो चुका पश्चिमी राजस्‍थान का जैसलमेर जिला प्राचीनतम जीवाश्‍मों व मेरिन फॉसिल्‍स की उपलब्‍धता का केन्‍द्र रहा हैं।
  • दुनिया का सबसे पुराना जीवाश्‍म है यहां, आयु में 18 करोड़ वर्ष
  • वृक्ष खड़ी अवस्‍था में ही जीवाश्‍म में तब्‍दील हो गए जो इतने वर्षों के भौगोलिक परिवर्तनों के बाद अब रेतीली सतह पर दर्शित हुए हैं।
  • आकल के इस वुड फॉसिल्‍स पार्क में 18 वुड फॉसिल्‍स अच्‍छी तरह सतह पर विद्यमान हैं जिन्‍हें सुरक्षित तरीके से प्रदर्शित किया गया हैं। इनमें सबसे लम्‍बा वुड फॉसिल्‍स 13 मीटर लम्‍बा और एक मीटर घेरे वाला हैं।
  • आकल वुड फॉसिल पार्क पुरातन जीवाश्‍मों के संग्रहालय के रूप में देश और दुनिाय में प्रसिद्ध है।

 

v    उत्‍खनित साक्ष्‍यों की नजर से नोह

  • नोह पुरास्‍थल जिला मुख्‍यालय भरतपुर में बछामदी के पास स्थित है।
  • 1963-64 में पुरास्‍थल एवं संग्रहालय विभाग एवं केलिफोर्निया विश्‍वविद्यालय के संयुक्‍त अभियान में निवर्तमान निदेशक रत्‍नचन्‍द्र अग्रवाल के निर्देशन में प्रारम्‍भ हुआ। यहां से प्राप्‍त अवशेषों के आधार पर नोह महाभारत-कालीन आर्यों का नगर था।
  • नोह की खुदाइ्र से यह तथ्‍य भी सामने आया कि भारत में लौह का सर्वप्रथम उपयोग इसी स्‍थान से आरम्‍भ हुआ।

 

v    राज्‍य स्‍तरीय एकीकृत कॉल सेन्‍टर का उद्घाटन

  • मुख्‍यमंत्री अशोक गहलोत ने तीन अगस्‍त को जयपुर के योजना भवन में सुचना प्रौ‍द्योगिकी एवं संचार विभाग द्वारा आमजन की सुविधा, सुनवाई एवं जानकारी के लिए स्‍थापित किए गए राज्‍य स्‍‍तरीय एकीकृत कॉल सेन्‍टर का विधिवत उद्घाटन किया।
  • इसका टोल फ्री नम्‍बर 1800-180-6127 है।
  • हिन्‍दी एवं अंग्रेजी भाषा में जानकारी उपलब्‍ध करवाएगा।
  • लोक शिकायतें भी दर्ज की जाएगी।

 

v    जायल में रचा गया स्‍वर्णिम इतिहास

  • 2938 करोड़ रूपये लागत की राजस्‍थान ग्रामीण पेयजल और फ्लोराइड निराकरण परियोजना नागौर (द्वितीय चरण) का शिलान्‍यास 20 जून को राष्‍ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्‍यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने नागौर जिले के जायल कस्‍बे में किया।
  • जापान इन्‍टरनेशनल कॉआरेशन एजेन्‍सी (जायका) के सहयोग से प्रस्‍तावित इस वृहद एवं महत्‍तवकांक्षी पेजयल परियोजना को आगामी 4 वर्षों मे पूर्ण करने का लक्ष्‍य रखा गया है।
  • 761 करोड़़ रूपये से अधिक की लागत की नागौर लिफ्ट कैनाल पेयजल परियोजना (प्रथम चरण) के प्रगतिरत कार्य।
  • द्वितीय चरण के सभी कार्य पूर्ण हो जाने पर सम्‍पूर्ण नागौर जिले के नागरिकों को इंदिरा गांधी नहर के माध्‍यम से मीठा पानी उपलब्‍ध हो जाएगा। नागौर एवं बासनी कस्‍बे में मीठे पानी की जलापूर्ति शुरू हो गई है।




14 Nov, 2019, 14:15:33 PM