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Defence Deals

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चंद्रयान 2 के लांच की तिथि घोषित

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो के अध्यक्ष डॉक्टर के. सिवान ने चन्‍द्रमा के लिए भारत के आगामी चंद्रयान-2 अभियान के बारे में 12 जून 2019 को बताया कि चंद्रयान देव को जीएसएलवी MK3 एम 1 के प्रक्षेपण यान द्वारा 15 जुलाई, 2019 को श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया जाएगा।

2030 तक भारत का स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की इसरो की घोषणा

अपने गगनयान अभियान (चंद्रमा पर मानव भेजने की योजना) के पश्चात इसरो अंतरिक्ष में अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की योजना बना रहे हैं।

इस संबंध में इसरो के चेयरमैन डॉक्टर के. सिवान ने 13 जून, 2019 को प्रेस कांफ्रेंस में घोषणा की कि वर्ष 2030 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित किया जाएगा।

भारत द्वारा तैयार किए जाने वाली इस अंतरिक्ष स्टेशन को किसी भी अन्य देश की साझेदारी के बिना विकसित किया जाएगा।

भारत का यह स्पेस स्टेशन 20 टन क्षमता का होगा, जिसमें 4-5 अंतरिक्ष यात्री एक साथ 15-20 दिन तक रह सकेंगे।

स्वदेश में विकसित एचएसटीडीवी(HSTDV) का सफल परीक्षण

भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेश में विकसित 'हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर व्हीकल' (Hypersonic Techonolgy Demonstrator Vehicle-HSTDV) का बालासोर स्थित अब्दुल कलाम द्वीप से 12 जून, 2019 को सफल परीक्षण किया।

उपर्युक्‍त किया गया परीक्षण हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली विकसित करने संबंधी देश के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का हिस्सा है।

एचएसटीडीवी वस्तुतः एक स्क्रैमजेट डेमोंसट्रेशन एयरक्राफ्ट है तथा स्क्रैमजेट इंजन के कारण यह मेक-6 की गति से अपने लक्ष्य को भेद सकती है।

इस तकनीक का उपयोग लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल की लॉन्चिंग के साथ ही कम व्यय पर उपग्रहों के प्रक्षेपण में भी किया जा सकता है

रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी बनाने को मंजूरी

केंद्रीय सरकार के अंतरिक्ष में सशस्त्र बलों की ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से एक नई एजेंसी बनाने को 11 जून, 2019 को मंजूरी दे दी।

वस्तुतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति ने 'रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी' (Defence Space Research Agency-DSRA) बनाने को मंजूरी दी है।

जिसे उच्च क्षमता की अंतरिक्ष युद्ध हथियार प्रणालियों तथा प्रौद्योगिकी को विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस एजेंसी को वैज्ञानिकों की एक टीम उपलब्ध कराई जाएगी, जो की तीनों सेनाओं के साथ मिलकर काम करेगी।

यह एजेंसी 'डिफेंस स्पेस एजेंसी' (डीएसए) को शोध एवं विकास (Research and Develpment) में सहयोग करेगी।

'डीएसए' का गठन अंतरिक्ष में युद्ध लड़ने में सेना का सहयोग करने के लिए किया गया है। इसमें तीनों सेनाओं के सदस्य सम्मिलित हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत ने मार्च 2019 में अपनी एंटी-सेटेलाइट मिसाइल द्वारा अंतरिक्ष में जीवित उपग्रह को नष्ट करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था।

भारतीय वायु सेना ने इजरायल से 100 स्पाइसबॉम्ब खरीदने का सौदा किया 

भारतीय वायु सेना इजराइल से वह बम खरीदने जा रही है जिसका उपयोग करके भारतीय वायु सेना ने बालाकोट (पाकिस्तान) स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को 26 फरवरी, 2019 को नष्ट किया है।

भारत की वायु सेना ने इजराइल रक्षा कंपनी 'रफाइल एडवांस डिफेंस सिस्टम' द्वारा बनाई जाने वाली स्पाइस 200 (Spice 200) बम खरीदने का सौदा जून, 2019 में किया।

रु 300 करोड़ की इस रक्षा सौदे के तहत भारत और इजराइल से 100 स्पाइस बम में प्राप्त होंगे ।

900 किलो के स्टील केसिंग में 80 किलोग्राम सामग्री से भरे हुए इस बम की विध्वंसक क्षमता अत्यंत घातक है।





16 Oct, 2019, 04:55:44 AM